17/05/2019

धूम्रपान निषेध अधिनियम 2003 COTPA के बारे में विस्तार से जानिए

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धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है इसे तमाम प्रकार के खतरे होते हैं आपके फेफड़े खराब हो जाते हैं इस प्रकार के वाक्य आपने पहले भी सुने होंगे और इन्हीं से बचाव के लिए सरकार, देश के संविधान और कानून ने जो कदम उठाए वह धूम्रपान निषेध अधिनियम 2003 कहा जाता है| आइए अधिनियम 2003 के बारे में विस्तार से जानते हैं|


धूम्रपान निषेध अधिनियम की आवश्यकता आखिर क्यों?

धूम्रपान से होने वाले तमाम से खतरे पाए जाते हैं सिगरेट बीड़ी आदि धूम्र नशा से युक्त नशीले पदार्थों को पीने वाले को जितना नुकसान होता है उतना नुकसान इस धुएं में सांस लेने वाले सामान्य व्यक्ति को भी होता है| धूम्रपान करने वाले व्यक्ति तो अपना नुकसान जानबूझकर कर रहे होते हैं परंतु उसका क्या धूम्रपान नहीं करना चाहता और उसके जहरीले धुएं के प्रदूषण से होने वाले नुकसान से अपना बचाव करना चाहता है|
जब तक व्यक्ति स्वयं नशे का त्याग नहीं करना चाहेगा तब तक आप उससे नशा नहीं त्याग करा सकते| परंतु जो व्यक्ति नशे से दूर रहना चाहता है उसके परिवेश की सुरक्षा के लिए सार्वजनिक स्थानों पर नशा करने पर रोक लगाने का फैसला किया गया ताकि वहां मौजूद सामान्य मनुष्य धूम्रपान कर रहे व्यक्तियों के मुख से निकलने वाले जहरीले प्रदूषण मुक्त धुएं का शिकार ना हो उसे कोई तकलीफ ना पाए|

चलिए जानते हैं धूम्रपान निषेध अधिनियम 2003 असल में है क्या?

सीधे शब्दों में कहे तो सार्वजनिक जगहों पर सामान्य लोगों को तकलीफ से बचाने के लिए धूम्रपान को निषेध किया गया अर्थात धूम्रपान करने वाले व्यक्ति सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान नहीं कर सकते| 

सबसे पहले भारतीय रेल से हुई अगर आपने कभी रेल में सफर किया है तो आपने कहीं ना कहीं उसमें यह जरूर लिखा देखा होगा कि धूम्रपान करना निषेध है जुर्माना भी लग सकता है|

भारतीय रेल ने 1989 में धूम्रपान वर्जित करने के लिए कानूनी तौर पर व्यवस्था की और इसमें साफ तौर पर कहा गया खेल परिसर के अंदर धूम्रपान वर्जित है और अगर कोई भी व्यक्ति ऐसा करता हुआ पाया जाता है तो उस पर ₹100 के जुर्माने की व्यवस्था है. परंतु भारतीय समाज सकारात्मक चीजों और नियमों को जल्द स्वीकार नहीं करता इसलिए यह व्यवस्था प्रभावी नहीं रही| परिवर्तन इच्छाशक्ति से आते हैं कानून तो उनको एक संवैधानिक रूप देते हैं|

उसके बाद कई वर्षों तक यह मुद्दा यूं ही पड़ा रहा और फिर सन 2003 में इस संबंध में एक स्पष्ट कानून पारित किया गया सिगरेट बीड़ी और किसी अन्य प्रकार के धूम्रपान श्रेणी में आने वाले उत्पाद का सार्वजनिक जगहों पर इस्तेमाल करना कानूनन अपराध घोषित किया गया तथा इसे सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003 कहां जाने लगा, बोलचाल की भाषा में इसे धूम्रपान निषेध अधिनियम 2003 कहते हैं आसानी होती है. इस अधिनियम को कोटपा भी कहते हैं यानी कि सिगरेट एंड अदर टोबैको प्रोडक्ट एक्ट.

उसके बाद से ही सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान ने पूरी तरह से निषेध कर दिया गया है सार्वजनिक स्थान में वह सभी स्थान आते हैं जिनमें समाज का हर व्यक्ति विशेष उपस्थित होता है आता जाता हो या समय व्यतीत करता हो| उदाहरण के रूप में कॉलेज, पार्क, हॉस्पिटल रेलवे, बस स्टॉप शॉपिंग मॉल, अदालत और अन्य सरकारी संस्थाएं इत्यादि सभी सार्वजनिक स्थानों में आती है यानी कि उन सभी जगहों पर यह कानून लागू होता है|

इस कानून के अंतर्गत सीधे शब्दों में अपराध क्या है?

  • किसी सार्वजनिक स्थल के आसपास धूम्रपान करना
  • विद्यालय कॉलेज शिक्षण संस्थानों के 100 मीटर के दायरे में तंबाकू उत्पादक बेचना
  • 18 उम्र से कम उम्र के बच्चों को तंबाकू उत्पाद बेचना या खरीदने के लिए प्रेरित करना
  • बिना संवैधानिक चेतावनी के तंबाकू उत्पादों का निर्माण करना हुआ और विक्रय करना
  • तंबाकू सिगरेट आदि उत्पादों का सार्वजनिक जगह पर प्रचार करना

अधिनियम के तहत दी जाने वाली सजा अथवा अर्थदंड

  • अगर आप धूम्रपान करते हुए पाए जाते हैं किसी सार्वजनिक स्थल पर तो आपको ₹200 कम से कम जुर्माना देने का प्रावधान है.
  • 18 साल से कम उम्र के युवक या युवती को तंबाकू का कोई भी उत्पाद बेचने पर 7 साल की सजा का प्रावधान है उस व्यक्ति को 7 साल की सजा के साथ साथ ₹100000 तक का जुर्माना भी देना पड़ सकता है.
  • यदि स्कूल अथवा कॉलेज के 100 मीटर के दायरे में कोई उत्पाद भेजते हुए पाए जाते हैं तो भी ₹200 का जुर्माना देना पड़ता है.
  • तंबाकू के किसी भी उत्पाद को विज्ञापन के द्वारा प्रचारित करने अपराध की श्रेणी में लिया जाता है यह दो से 5 वर्ष की सजा और 5000 से 10000 रुपए तक का जुर्माना का प्रावधान है.
  • अगर कोई तंबाकू उत्पाद बनाने वाला सचित्र संवैधानिक चेतावनी के बगैर कोई उत्पाद बनाता होता है तो पहली बार उसे 2 साल की सजा और ₹5000 का जुर्माना लगाया जाता है वही अगर किसी अपराध को वह दोबारा करते हुए पकड़ा जाता है 10000 का आर्थिक दंड और 5 साल की सजा दी जाती है .
  • वहीं रिटेलर को जो उस तंबाकू के उत्पाद को बेचने का कार्य करता है उसे 1 साल की सजा ₹1000अर्थदंड पकड़े जाने पर 2 साल की सजावट अर्थ दंड देना पड़ता है.
धूम्रपान निषेध अधिनियम 2003 के संबंधित सवालों को टिप्पणी करके पूछा जा सकता.