18/06/2019

क्या अब्दुल कलाम गीता पढ़ते थे? बड़ी ही प्रेरणादायी घटना थी ये

सभी प्रखर ज्ञानियों के ज्ञान का स्रोत कुछ न कुछ तो होता ही है कई लोग उस ज्ञान के स्रोत को ढूंढने में ही जीवन बर्बाद कर लेते हैं पर अंत तक उसे प्राप्त नहीं कर पाते. वही कुछ लोग शुरुवाती दिनों में ही ऐसे किसी व्यक्ति से टकरा जाते हैं जिसकी वजह से उन्हें ज्ञान का वो स्रोत हासिल हो ही जाता है.
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भारत के लोकप्रिय राष्ट्रपति अब्दुल कलाम का जीवन एक सफल मगर मोह से मुक्त व्यक्ति के जैसा था. अक्सर लोग इनके जीवन से जुड़े पहलुओं पर विचार करते हुए सवाल करते हैं की क्या अब्दुल कलाम गीता पढ़ा करते थे?
यदि संक्षेप में कहे तो हाँ, एपीजे अब्दुल कलाम गीता ज्ञान पढ़ते थे और उन्होंने गीता को एक मार्गदर्शक के रूप में अपने जीवन में अच्छे से इस्तेमाल भी किया. अब्दुल कलाम के जीवन का एक अहम हिस्सा थी गीता ज्ञान की पुस्तक.
आज आपको उस घटना के विषय में बताते हैं जिसने अब्दुल कलाम के जीवन में इतने बदलाव किये.

एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन की प्रेरणादायी घटना

एक दिन चेन्नई में समुद्र के शांति पूर्ण वातावरण में किनारे धोती व शाल पहने हुए एक सज्जन माधव का गीता ज्ञान पढ़ रहे थे।

तभी वहां एक लड़का आया और बोला - "आज साइंस का जमाना है फिर भी आप लोग ऐसी किताबे पढ़ते हो?

सज्जन ने कहा - "ऐसी किताबे से आपका मतलब!"

लड़का बोला - "देखिए जमाना चांद पर पहुंच गया है और आप लोग वही 'गीता व रामायण' पर ही अटके हुए हो?"

उन सज्जन ने उस लड़के से पूछा - "आप 'भगवद्गीता' के विषय में क्या जानते हो?"

वह लड़का जोश में आकर बोला - "अरे छोड़ो! मैं विक्रम साराभाई रीसर्च संस्थान का छात्र हूँ। मैं वैज्ञानिक हुं। यह गीता बेकार है हमारे लिये।"

लड़के की मुर्खता पर वह सज्जन बहुत जोर से हसने लगे। तभी दो बड़ी बड़ी गाड़िया वहां आयी। एक गाड़ी से कुछ ब्लैक कमांडो निकले और एक गाड़ी से एक सैनिक। सैनिक ने पीछे का दरवाजा खोला तो वो सज्जन पुरुष बड़ी शांति के साथ चुपचाप गाड़ी में जाकर बैठ गये।

लड़का यह सब देखकर हक्का बक्का था। उसने दौड़कर उनसे पूंछा - "सर, सर..! आप कौन हो?"

वह सज्जन बोले - "मैं ही वो विक्रम साराभाई हूँ और बेटे ये गीता है कोई ऐसी वैसी किताब नहीं है."

सुनकर लड़के को 440 वोल्टस का झटका लगा। यह लड़का डा. अब्दुल कलाम थे। इस घटना ने अब्दुल कलाम को बहुत प्रभावित किया. वो भी गीता पढने में रूचि रखने लगे. उन्होंने इसी भगवद गीता को पढ़कर आजीवन मांस न खाने की प्रतिज्ञा की थी। जीवन में आने वाले संघर्षो से निपटने की हर सूझ बुझ उन्हें गीता में मिल जाती थी.

गीता के विषय में रोचक

गीता की एक खास बात है यदि आप उसे पूर्ण श्रद्धा और लगन से जीवन में उतारते हैं तो आपको सफल इन्सान बनने से कोई रोक नहीं सकता मगर इसके साथ ही आप शांतचित्त व्यक्ति खुद ही बन जायेंगे क्यूंकि गीता ज्ञान घमंड को नष्ट कर देता है. आपकी स्थिति रामदेव सी हो जाएगी ताकत और संपत्ति तो अपार होगी मगर इच्छा और मोह किसी में नहीं होगा.

अब्दुल कलाम भी देश के उच्च शिखर यानी राष्ट्रपति पद पर पहुंचे. उनके बारे में जाने वाले कहते हैं की वो एक एसे राष्ट्रपति थे जिन्होंने संपत्ति सैलरी से नहीं देशसेवा से प्रेम किया. अब्दुल कलाम के बारे में कहा जाता है की वो केवल एक झोला लेकर राष्ट्रपति भवन गए थे और कार्यकाल समाप्त होने पर भी उनके पास निजी संपत्ति के रूप में वही था.

जब अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति चुनने की बात उठाई गयी तो कांग्रेस समेत कई दलों ने कलाम सर का विरोध किया क्यूंकि बहुत से मुस्लिम मजहब गुरु, अब्दुल कलाम से नफरत करते थे. परन्तु उस वक्त बीजेपी की सरकार थी और बीजेपी के अधिकतर लोग कलाम सर के पक्ष में थे इसलिए बीजेपी ने उन्हें राष्ट्रपति चुना.