11/06/2019

दुनिया की सबसे प्राचीन भाषाएँ कौन-कौन सी है? oldest languages in world

विश्व में अगल-अगल देशो में बातचीत के लिए अनगिनत भाषाएँ बोली जाती हैं उनकी लिपि भी अगल ही होती है ये सभी भाषाएँ जनजाति और उनके क्षेत्रीय रहन सहन के आधार पर भी हो सकती हैं. परन्तु क्या आप जानते हैं दुनिया की सबसे प्राचीन भाषाएँ कौन-कौन सी है? किस भाषा का जन्म सबसे पहले हुआ और उसका प्रथम प्रयोग कहा हुआ? अगर नहीं तो आज इस लेख में हम आपको दुनिया की सबसे पुरानी भाषाओँ के बारे में जानकारी देंगे और ये भी बताएँगे की सबसे पहले किस भाषा की उत्पत्ति हुयी.

वर्तमान समय में इंग्लिश का इस्तेमाल सबसे अधिक हो रहा है परन्तु इंग्लिश कोई प्राचीन भाषा नहीं है मगर प्रचारित ज्यादा होने की वजह से उपयोग बढ़ गया है. अब सवाल उठता है की सबसे पुरानी भाषा कौन सी है और किसकी उत्त्पत्ति सबसे पहले हुयी थी?

दुनिया की सबसे प्राचीन भाषाएँ

duniya ki sabse purani bhashayen
भाषा विदों ने वर्षो शोध किया और जानकारियां हासिल की. कई पुराने शिलालेख खोजे और उन पर लिखी लिपि की जाँच कर के पता लगाया की वो कौन सी भाषा है. इन शोधो में कई प्राचीन पुस्तके और ग्रन्थ भी मिले. आखिर में निकले निष्कर्ष के आधार पर पता लगाया गया की कौन सी भाषा सबसे पुरानी है.

विश्व की सबसे प्राचीन भाषाएँ निम्न क्रम में दी गयी है.

1. संस्कृत (Sanskrit) भाषा

संस्कृत दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा है ये मात्र भारत की भाषा नहीं है दुनिया भर के अनेको देशो भारत, नेपाल, ईरान, मियांमार(बर्मा), चीन और ईराक में इसके प्राचीन सबूत पाए गए हैं. इतना ही नहीं दुनिया की सबसे पुरानी धर्म और विज्ञानं की पुस्तके "वेद" भी संस्कृत भाषा में लिखे पाए गए है.

संस्कृत बहुत ही वैज्ञानिक द्रष्टिकोण पर आधारित भाषा है वर्तमान समय में जितना भी विज्ञान खोजा गया है वो अरबों साल (अनुमानित) पुराने वेदों में पहले से ही संस्कृत में दिया गया है. वायुयान निर्माण से लेकर चिकित्सा विज्ञानं यानी आयुर्वेद का ज्ञान वेदों में ही है.

इस भाषा को देव भाषा कहा जाता है इसका इस्तेमाल आज से अरबो वर्षो पूर्व चरम पर था. परन्तु वर्तमान समय में दक्षिण भारत में बोलचाल की भाषा में इसका उपयोग तमिल (संस्कृत बोली) के साथ मिले जुले रूप में होता है.

संस्कृत लिपि / वर्णमाला-
वर्तमान में भारत में इस्तेमाल की जाने वाली अनेको भाषाओँ जैसे हिंदी आदि को लिपिबद्ध करने यानी लिखने के लिए आज भी संस्कृत की वर्णमाला के ही अक्षरों का उपयोग किया जाता है. दुनिया की सबसे वैज्ञानिक गुणों वाली किसी भी ध्वनि को लिखने में समर्थ लिपि "देवनागरी" संस्कृत वर्णमाला पर आधारित है.

भारत और नेपाल में इस भाषा का उपयोग चरम पर है लगभग प्रत्येक धार्मिक कार्य में संवाद के लिए इसका ही उपयोग होता है. अमेरिका समेत दुनिया के अनेको देशो में जहा इस्कोन की संस्थाएं है वह विदेशियों में भी संस्कृत सीखने का चलन बढ़ रहा है. भारत के हरिद्वार जैसे क्षेत्रो में इसका बहुत उपयोग है.

2. तमिल (Tamil)

दुनिया की दूसरी सबसे पुरानी भाषा तमिल Tamil है तमिल भाषा के सन्दर्भ में कोई अधिक पुराना लेख तो मौजूद नहीं है मगर ये भाषा संस्कृत उच्चारणों पर आधारित है यानी तमिल बोलने में संस्कृत जैसी है मगर लिखने में अलग है.

तमिल के सन्दर्भ में एक उदहारण से समझने का प्रयास करते है.

जैसे आप संस्कृत शब्द "कुमारं"(अर्थ = पुत्र) को संस्कृत में "कुमारं" ही बोलते है और "कुमारं" ही लिखते हैं. मगर तमिल में बोला तो "कुमारं" ही जायेगा परन्तु लिखा "குமாரன்" जायेगा.

तमिल भाषा बिलकुल उसी तरह से जन्मी है जैसे हम किसी हिंदी शब्द "चाकू" को अंग्रेजी के अक्षरों में "Chaku" लिख दें मगर बोलेंगे तब भी "चाकू" ही. यानी ये भाषा हिंदी ही रहेगी मगर लिपि बदल जाएगी.

लिपि अलग होने की वजह से धीरे धीरे तमिल में नए शब्दों का इस्तेमाल बढ़ गया, और राजनितिक स्तर पर इसे एक अलग भाषा का नाम दे दिया गया. वर्तमान में दक्षिण भारत में राजनितिक कलह फैलाने के लिए इस भाषा के संस्कृत से भी पुराने होने का मुर्खतापूर्ण दावा किया जाता है.

संस्कृत के बाद तमिल ही एक एसी भाषा है जो बाकी सभी भाषाओँ से पुरानी है इसलिए इसका स्थान दूसरी सबसे पुरानी भाषाओँ में आता है.

निष्कर्ष

यहाँ आपने जाना की दुनिया की सबसे प्राचीन भाषाएँ कौन सी हैं. पुरे शोध में सार यही निकलता है की दुनिया की सबसे पुरानी भाषा संस्कृतं ही है. अलग अलग लिपि में लिखी जा रही अनेको भाषाओँ का आधार भी संस्कृत ही है.

एक शोध में देखा गया है की संस्कृत बोलने का निरंतर अभ्यास करने से वाणी में मधुरता आ जाती है. इसलिए संस्कृत को शौक से सीखे.

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