30/07/2019

सैयद और गाजी की उपाधि किसे मिलती थी?

इतिहास में गाजी और सैयद लोगों का इतिहास पढ़ा होगा और इतनी तो जानकारी आपको पहले ही मिल चुकी होगी कि निर्दोषों की हत्या करने वाले को इन उपाधियों के द्वारा नवाजा जाता था विस्तार से जानकारी के लिए पूरा लेख पढ़ें. क्या गाजी और सैयद लोग हिंदुओं के हत्यारे थे? गाजी की उपाधि किसे मिलती थी? इस लेख में आप के कई सारे सवालों के जवाब दिए गए.

आप ने कई सारे मुसलमानों के नाम में सैयद शब्द सुना होगा. ज्यादातर मजारों के नाम सैयद बाबा इत्यादि से होते हैं कई सारे जीवित मुसलमान भी अपने नाम में सैयद लगाते हैं क्या आपको पता है सैयद का प्रारंभ कैसे हुआ? और इसका अर्थ क्या है? यदि नहीं तो आज का यह लेख आपको इस ऐतिहासिक जानकारी से रूबरू कराएगा.

सैयद और गाजी की उपाधि

भारत में 1000 साल के औसतन समय तक अनेक प्रकार के मुस्लिमों का आतंक रहा. इस समय अपने भरपूर अत्याचार अन्य धर्म के लोगों पर किए गए यह जानकारी सर्वविदित है.

Sayyad aur Gazi hindu hatyaro muslimo ki upadhi

हिंदू और बुद्ध आदि पर मारकाट को बढ़ावा देने के लिए मुस्लिम मौलवियों द्वारा "सैयद और गाजी" नाम की उपाधि का निर्माण किया गया था. असल में यह किसी भी प्रकार की जाती नहीं बल्कि एक उपाधि है.

हत्यारों को मिलती थी गाजी और सैयद की उपाधि

जो व्यक्ति इस्लाम मजहब का ना हो और मुसलमान ना हो उस व्यक्ति को कुरान और इस्लाम के नियमों के द्वारा काफिर कहा जाता है और काफिरों को मारने वाले को गाजी और सैयद की उपाधि दी जाती थी. गाजी की उपाधि प्राप्त करने वाले अधिकतर लोग मुस्लिम शासक होते हैं, परंतु सैयद की उपाधि प्राप्त करने के लिए शासक होना आवश्यक नहीं था.

यदि कोई सामान्य मुस्लिम 100 से अधिक हिंदुओं की हत्या कर देता था तो उसे सैयद की उपाधि दी जाती थी. और मुस्लिम मौलानाओं की तरफ से उसे अल्लाह के लिए काम करने वाला अल्लाह का प्यारा बंदा घोषित कर दिया जाता था. उसकी मजार बनाकर के जबरन हिंदुओं से उसकी आराधना कराई जाती थी इंकार करने वाले लोगों को मार दिया जाता था. अलार्म कि आज के समय में ऐसा कोई दबाव नहीं है परंतु भ्रमित हिंदू आज भी मजारों पर जाते हैं.

उसे मुस्लिम समाज की तरफ से सम्मानित माना जाता था और उसके मरने के बाद उसकी साधारण कब्र नहीं बनाई जाती थी बल्कि बहुत खूबसूरत मजार बनाई जाती थी, ताकि दूसरे मुसलमान प्रेरणा लेकर उसके जैसे ही कार्य करें. 

ऐसी ही एक मजार बहराइच में "सैयद सालार मसूद गाजी" के नाम से है. मुख्य बात यह है कि वहां पर सबसे ज्यादा हिंदुओं की जनसंख्या पहुंचती है. जबकि गाजी की उपाधि किसे दी जाती थी यह सभी को पता है.

बाबर अकबर और जहांगीर को भी गाजी की उपाधि

मुगल आक्रांता बाबर और उसके वंशज अकबर को भी गाजी की उपाधि मिली थी. यह उपाधि उसे तब मिली जब उसने कब्जा करने के लिए अनेकों हिंदुओं का नरसंहार किया.

बाबर ने अपने विजय पत्र में अपने को मूर्तियों का खंडन करने वाला बताया। हिंदुओं का नरसंहार करके बाबर ने गाजी की उपाधि प्राप्त की। गाजी वह, जो काफिरों का कत्ल करे। बाबर ने अमानुषिक ढंग से तथा क्रूरतापूर्वक हिन्दुओं का नरसंहार ही नहीं किया, बल्कि अनेक हिन्दू मंदिरों को भी नष्ट किया। बाबर की आज्ञा से मीर बाकी ने अयोध्या में राम जन्मभूमि पर निर्मित प्रसिद्ध मंदिर को नष्ट कर मस्जिद बनवाई, इसी भांति ग्वालियर के निकट उरवा में अनेक जैन मंदिरों को नष्ट किया। उसने चंदेरी के प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिरों को भी नष्ट करवा दिया था, जो आज बस खंडहर हैं।

अकबर के पुत्र जहांगीर ने गाजी की उपाधि पाने के लिए एक है हिंदू का सर धड़ से अलग कर दिया था तब अकबर और अन्य लोगों ने उसे गाजी की उपाधि से नवाजा था. आज भी अनेकों मुस्लिम अपने नाम में सैयद को लगाकर शान से घूमते फिरते हैं.

भ्रमित जनमानस

हास्यास्पद बात यह है की इन सैयद और गाजी उपाधि वाले मुस्लिमों की मजारों पर वर्तमान समय में अनेकों भ्रमित लोग माथा टेकते है. क्योंकि उन्हें इस प्रकार प्रचारित किया गया है जैसे वह भगवान का अवतार हो, वर्तमान समय में भगवान के नाम पर लोगो को जो भी बता दिया जाए उसे मानने लगते हैं किसी भी मजार मस्जिद चर्च इत्यादि में अपना भगवान ढूंढना उनकी खूबी हो चुकी है.